यह ज़ियारत इमाम ज़ैन-उल-आबिदीन (अ.स.) ने उस वक्त पढ़ी थी जब वह कर्बला के मैदान में मौजूद नहीं थे (बीमारी के कारण), लेकिन उन्होंने इतनी विस्तार से हर शहीद का ज़िक्र किया जैसे वह खुद वहाँ मौजूद हों।
A famous line from this Ziyarat is the Imam's promise: "If the days have pushed me back and destiny has prevented me from helping you... I shall lament you every morning and evening, and I shall weep for you tears of blood." 3. Importance of Hindi Translations
: The best versions provide the Hindi translation directly under each Arabic line. This helps you understand exactly what you are reciting in real-time. ziyarat e nahiya in hindi
यह ज़ियारत कोई मामूली दुआ नहीं है। इस्लामी किताबों के अनुसार, यह ज़ियारत इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) ने अपने चार ख़ास नाइबों (deputies) में से एक के ज़रिए हम तक पहुंचाई थी। इसी वजह से इसे (Ziyarat al-Nahiya al-Muqaddasa) भी कहा जाता है, यानि वह ज़ियारत जो पाक जगह (यानि इमाम) की तरफ से जारी हुई।
कर्बला के अन्य ऐतिहासिक विवरण। This helps you understand exactly what you are
इसकी शुरुआत आदम (अ.स.) से लेकर पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.व.) तक विभिन्न नबियों पर सलाम भेजने से होती है।
ज़ियारत-ए-नहिया: कर्बला का दर्द और इमाम-ए-ज़माना (अ.त.फ़.श.) का विलाप प्रस्तावना ziyarat e nahiya in hindi
(Ziyarat e Nahiya) शिया मुसलमानों के लिए इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों के प्रति अपनी वफादारी, शोक और अकीदत (आस्था) को व्यक्त करने वाली सबसे भावुक और ऐतिहासिक ज़ियारतों में से एक है। यह ज़ियारत इमाम ज़मान (अ.स.) द्वारा सुनाई गई मानी जाती है और इसमें कर्बला की भयानक घटनाओं का आँखों देखा हाल जैसे विवरण मिलते हैं।
इसमें एक प्रसिद्ध वाक्यांश है जहाँ इमाम महदी (अ.त.फ़.श.) कहते हैं: "अगर मैं उस समय मौजूद नहीं था कि आपकी रक्षा कर पाता... तो मैं आपके लिए सुबह-शाम रोऊँगा और आँसूओं के बजाय खून बहाऊँगा" । आध्यात्मिक प्रभाव
Ziyarat-e-Nahiya Urdu Translation | PDF | Shia Islam - Scribd
इमाम महदी (अ०स०) इसमें अपने दादा इमाम हुसैन (अ०स०) पर हुए अत्याचारों का वर्णन करते हुए कहते हैं कि "यदि इतिहास ने मुझे देर से पैदा किया और मैं कर्बला में आपकी मदद नहीं कर सका, तो मैं सुबह-शाम आपके दुःख में रोऊँगा और आँसू के बदले खून बहाऊँगा।"