1939 में, हिटलर ने पोलैंड पर हमला किया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। जर्मनी ने कई यूरोपीय देशों पर कब्जा कर लिया, लेकिन सोवियत संघ और मित्र राष्ट्रों के खिलाफ लड़ाई हार गया।
हिटलर ने जर्मनी की हर विफलता के लिए यहूदियों को जिम्मेदार ठहराया।
एडॉल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 को ऑस्ट्रिया के ब्रौनाउ एम इन (Braunau am Inn) नामक शहर में हुआ था। युवावस्था में वह एक पेंटर बनना चाहता था, लेकिन वियना की 'एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स' ने उसे दो बार खारिज कर दिया।
4. नाजी पार्टी का उदय (Rise of the Nazi Party) hitler the rise of evil in hindi
कहानी हिटलर के बचपन और उसके सख्त पिता के साथ संबंधों से शुरू होती है। हिटलर वियना में एक आर्टिस्ट बनना चाहता था, लेकिन वह असफल रहा। इसके बाद वह म्यूनिख (जमनी) चला गया। प्रथम विश्व युद्ध (World War I) के दौरान वह जर्मन सेना में शामिल हुआ, जहाँ उसे उसकी वीरता के लिए 'आयरन क्रॉस' मिला। युद्ध में जर्मनी की हार ने हिटलर को अंदर से झकझोर दिया और यहीं से उसके मन में नफरत का बीज बोया गया।
देश पर भारी आर्थिक जुर्माना (Reparations) लगाया गया।
लेकिन हिटलर की सबसे बड़ी भूल 1941 में सोवियत संघ (रूस) पर हमला करना साबित हुई। 'स्टेलिनग्राड की लड़ाई' में जर्मन सेना की करारी हार हुई। इसके बाद मित्र राष्ट्रों (अमेरिका, ब्रिटेन, सोवियत संघ) ने नाजी सेना को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया। यह एक सुनियोजित
वियना में गरीबी के दिनों ने हिटलर के मन में कड़वाहट भर दी। यहीं से उसमें यहूदी-विरोधी (Anti-Semitism) भावनाएं और जर्मनी के प्रति कट्टर राष्ट्रवाद पनपने लगा।
हिटलर की "बुराई" कोई दूर की अवधारणा नहीं थी; यह एक सुनियोजित, औद्योगिक पैमाने पर किया गया नरसंहार था, जिसे के नाम से जाना जाता है। 1933 से 1945 के बीच, नाजी जर्मनी ने लगभग 60 लाख (six million) यहूदियों की सुनियोजित तरीके से हत्या कर दी। इसके अलावा, लाखों पोल्स, सोवियत युद्धबंदी, रोमा (जिप्सी), समलैंगिक, विकलांग और राजनीतिक विरोधियों को भी मारा गया।
: How economic instability in post-WWI Germany was exploited through powerful oratory and the construction of a mythic "Führer" image. Viewer Considerations hitler the rise of evil in hindi
जनवरी 1933 में, जर्मनी के राष्ट्रपति पॉल वॉन हिंडनबर्ग ने हिटलर को जर्मनी का चांसलर (प्रधान मंत्री) नियुक्त किया। यह जर्मनी के लोकतंत्र के अंत की शुरुआत थी।
चांसलर बनते ही हिटलर ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलना शुरू कर दिया:
जर्मनी के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र छीन लिए गए।