इस संवाद के दौरान दोनों वक्ताओं ने अपने-अपने धर्मों के ग्रंथों के आधार पर ईश्वर की व्याख्या की:
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर निराकार (Nirguna) भी है और साकार (Saguna) भी। ईश्वर सर्वव्यापी है, इसलिए वह निराकार है, लेकिन भक्त के लिए वह साकार रूप में भी प्रकट हो सकता है।
यदि कल्पना की जाए कि दोनों एक मंच पर हों, तो यह एक असमान बहस होती क्योंकि दोनों के विषय ही अलग हैं:
डॉ. जाकिर नाइक ने अपने व्याख्यान की शुरुआत दोनों धर्मों के पवित्र ग्रंथों में मौजूद समानता पर जोर देते हुए की। उनके भाषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे: dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। आर्ट ऑफ लिविंग के बयान के अनुसार, जब जाकिर नाइक अपनी बातें कह रहे थे, तो हो गया था। ऐसे में श्री श्री रवि शंकर ने शांति बनाए रखने के लिए जवाबी बहस नहीं की (Did not press his argument)। उन्होंने सिर्फ कबीर का एक दोहा पढ़ा:
श्री श्री रवि शंकर ने ईश्वर को केवल एक संज्ञा के रूप में नहीं, बल्कि चेतना (Consciousness) के रूप में परिभाषित किया।
क्या आप किसी और धार्मिक बहस के बारे में जानना चाहेंगे? हमें कमेंट करके बताएं! इसलिए वह निराकार है
"मैं किसी से नहीं लड़ता। मेरा काम लोगों को प्रेम और शांति देना है। यदि कोई किसी और धर्म को बुरा कहता है, तो मैं उससे बहस नहीं करूंगा, बल्कि उसे बेहतर इंसान बनने का रास्ता दिखाऊंगा।"
2016 में, आर्ट ऑफ लिविंग ने एक बयान जारी कर दावा किया कि डॉ. नाइक की बातें लोगों को गुमराह करने और भड़काने वाली थीं। उनके इस बयान का उद्देश्य बांग्लादेश के ढाका हमले के बाद, डॉ. नाइक को लेकर बढ़ते विवादों और सवालों के बीच अपनी स्थिति स्पष्ट करना था।
1. बहस का संदर्भ और मुख्य विषय (Background and Topic) dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
डॉ. जाकिर के मूर्ति पूजा वाले तर्क पर श्री श्री ने समझाया कि मूर्तियां ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करने का एक माध्यम (Medium) हैं। जैसे कोई व्यक्ति अपने प्रियजन की तस्वीर देखकर उन्हें याद करता है, वैसे ही एक भक्त मूर्ति के माध्यम से निराकार ईश्वर से जुड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू मूर्ति की पूजा नहीं करते, बल्कि मूर्ति में मौजूद ईश्वर की चेतना की पूजा करते हैं।
यह डिबेट इस बात का उदाहरण थी कि कैसे दो अलग-अलग विचारधाराओं के लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए धार्मिक संवाद (Interfaith Dialogue) कर सकते हैं। हालाँकि मूर्ति पूजा जैसे विषयों पर मतभेद रहे, लेकिन ईश्वर की एकता पर दोनों की सहमति ने हिंदू-मुस्लिम संवाद में एक नया अध्याय जोड़ा।
बहस के समापन के बाद दोनों पक्षों के अनुयायियों ने अपने-अपने गुरु को विजयी माना। जहां जाकिर नाइक के समर्थकों ने उनके श्लोकों के याद रखने की क्षमता और तर्कों की सराहना की, वहीं श्री श्री के अनुयायियों ने उनकी शांति, सौम्यता और उदार दृष्टिकोण को सराहा। निष्कर्ष